Tuesday, January 22, 2019

3 में से सिर्फ 1 किसान को मिलता है कर्जमाफी का फायदा, चौंका देगी ये रिपोर्ट

राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में सत्तारूढ़ पार्टी भाजपा की विधानसभा चुनावों में हार और बीते वर्ष देश के कई हिस्सों में किसान आंदोलन के चलते कृषि क्षेत्र की चुनौतियां राष्ट्रीय मुद्दा बना. यह जरूरी भी था क्योंकि कृषि क्षेत्र देश में कुल रोजगार का 49 फीसदी है और देश की लगभग 70 फीसदी जनसंख्या इसपर आधारित है.

इस सच्चाई के बावजूद कृषि क्षेत्र हाशिए पर रहा है. वहीं मौजूदा समय में भी ये मुद्दा राजनीतिक लाभ और लोकलुभावन नीतियों के चलते किसान कर्जमाफी, अधिक न्यूनतम समर्थन मूल्य और हाल ही में तेलंगाना के रायथू बंधु स्कीम इर्दगिर्द सीमित है. 

हमें समझने की जरूरत है कि किसानों की समस्या रातों-रात नहीं पैदा हुई. नीति आयोग की 2017 की रिपोर्ट, किसानों की आमदनी को दोगुनी करने की पहल समेत कई ऐसी समीक्षा से साफ कि किसानों की समस्या 1991-92 में शुरू हुई. इस समय तक दोनों कृषि और गैर-कृषि क्षेत्रों में समान स्तर पर विकास हो रहा था.

जानें, किसानों को इस भंवर से निकालने के लिए क्या किया गया है.

कर्जमाफी से कुछ किसानों को फायदा, भूमिहीन के लिए बेअसर

कर्जमाफी किसी बिमारी का इलाज नहीं बल्कि कुछ किसानों को तत्काल प्रभाव से राहत पहुंचाने का एक जरिया है. इसका फायदा सिर्फ उन किसानों को मिलता है जिन्होंने संस्थागत कर्ज लिए हैं. पिछला एनएसएसओ सर्व 2013 के मुताबिक देश में 52 फीसदी कृषि परिवार कर्ज में डूबे हैं और इसमें महज 60 फीसदी परिवारों ने किसी संस्था से कर्ज लिया है. लिहाजा, साफ है कि महज 31 फीसदी (52 फीसदी का 60 फीसदी) कृषि परिवारों को कर्जमाफी का फायदा पहुंचने की उम्मीद है.

कमलनाथ ने 'इंडिया टुडे' से बातचीत में कहा, 'बीजेपी मध्य प्रदेश में ऑपरेशन लोटस का प्रयास कर रही है.' उन्होंने कहा कि कांग्रेस के पांच विधायकों से बीजेपी ने संपर्क कर प्रलोभन देने का प्रयास किया था. इसकी जानकारी इन विधायकों ने अपने मुख्यमंत्री को दी है. मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि बीजेपी कांग्रेसी विधायकों को प्रलोभन देकर उन्हें तोड़ने की कोशिश कर रही है ताकि उनकी सरकार को गिराया जा सके.

कमलनाथ ने हालांकि अपने सरकार के प्रति भरोसा जताया है और कहा कि उनकी सरकार को कोई खतरा नहीं है. उन्होंने यह भी दावा किया कि बीजेपी के पांच विधायक उनके संपर्क में हैं. बीजेपी के ये विधायक अपनी पार्टी में अपने भविष्य को लेकर आशंकित हैं. कमलनाथ ने कहा कि यदि बीजेपी उनके विधायकों को तोड़ने का प्रयास करती है तो वह भी वही करेंगे.

कर्नाटक का संकट

बता दें कि कर्नाटक में कांग्रेस-जेडीएस गठबंधन की सरकार पर उस समय संकट के बादल मंडराने लगे थे, जब दो विधायकों ने सरकार से अपना समर्थन वापस लेने की घोषणा की थी. इसके बाद सवाल उठने लगे थे कि सात महीने पहले कर्नाटक के मुख्यमंत्री बने जेडीएस के एचडी कुमारस्वामी की सरकार क्या चल पाएगी. असल में, कांग्रेस के कुछ असंतुष्ट विधायकों के मुंबई में बीजेपी नेताओं के संपर्क में होने की सुर्खियों के बाद कयासबाजी का दौर शुरू हो गया था और कर्नाटक में कांग्रेस-जेडीएस सरकार को लेकर सवाल उठने लगे थे. कहा जाने लगा था कि बीजेपी कर्नाटक में ऑपरेशन लोटस चला रही है जिसके तहत वह कांग्रेस के असंतुष्ट विधायकों को तोड़कर अपना सरकार बनाना चाहती है. वहीं एचडी कुमारस्वामी को सामने आना पड़ा और यह कहना पड़ा कि उनकी सरकार को कोई खतरा नहीं है.

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