Wednesday, January 30, 2019

न्यूनतम आय की गारंटी, बीजेपी सोचती रह गई और राहुल खेल गए दांव

"हम एक ऐतिहासिक फैसला लेने जा रहे हैं, जो दुनिया की किसी भी सरकार ने नहीं लिया है. 2019 का चुनाव जीतने के बाद देश के हर गरीब को कांग्रेस पार्टी की सरकार न्यूनतम आमदनी गारंटी देगी. हर गरीब व्यक्ति के बैंक खाते में न्यूनतम आमदनी रहेगी." ये शब्द हैं कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के जो उन्होंने छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में सोमवार को कहे. यह बयान महज शब्दों का जाल लग सकता है लेकिन इसके संकेत दूरगामी हैं. दूरगामी इसलिए कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी पार्टी बीजेपी जिस 'गारंटी' के बारे में मंथन ही करती रह गई, राहुल गांधी उसमें से घी निकालने का जुगाड़ कर बैठे.   

गारंटी की बात कर कांग्रेस अध्यक्ष ने छत्तीसगढ़ में जिस मुद्दे को उठाया है, उसे अधिकांश जनता की दुखती रग कह सकते हैं. भारत जैसे देश में ऐसे लोगों की बहुलता है जो असंगठित रोजगार की मार झेल रहे हैं. ऐसे में राहुल गांधी ने 'न्यूनतम रोजगार गारंटी' की बात कर उस जमात को साधने की कोशिश की है, जो दिन भर काम करने के बाद शाम के समय खुद को ठगा महसूस करता है. यहां गौर करने वाली बात ये है कि कांग्रेस की सरकार ने ही मनरेगा की शुरुआत की, जिसे गांव-देहात के लिए क्रांतिकारी योजना माना जाता है. यह अलग बात है कि उसे भ्रष्टाचार के घुन ने दूर तक खोखला किया है, लेकिन एक बड़ी तादाद मनरेगा पर आश्रित है, इसमें कोई संदेह नहीं. एक समय मनरेगा का विरोध करने वाले नरेंद्र मोदी ने मनरेगा का बजट बढ़ाया ही, कम नहीं किया. हां, बीजेपी सरकार यह दावा करती रही है कि उसके कार्यकाल में इस स्कीम में भ्रष्टाचार कम हुआ है.

कांग्रेस के युवा अध्यक्ष की उपरोक्त बातों में 'न्यूनतम रोजगार गारंटी' के अलावा एक शब्द और अहम है-'बैंक खाते में न्यूनतम आमदनी'. राजनीतिक दृष्टि से गारंटी और न्यूनतम आमदनी को कांग्रेस का बड़ा मास्टस्ट्रोक मान सकते हैं क्योंकि बात जब बैंक खाते और उसमें न्यूनतम आमदनी की होती है तो लोगों के जहन में '15 लाख रुपए' कौंध जाते हैं. लोगों के दिलोदिमाग पर जनधन खाते भी चक्करघिन्नी बनकर नाच उठते हैं क्योंकि गरीबों के लिए शुरू किए गए खाते का आज हश्र क्या है, किसी से छिपा नहीं. राहुल गांधी सोमवार को छत्तीसगढ़ में जब अपनी बात रख रहे थे तो बेशक उनके दिमाग में लोगों के वे आरोप रहे होंगे जिन्हें 'बीजेपी का जुमला (खाते में 15 लाख रुपए)' कहा जाता रहा है.

छत्तीसगढ़ से ही किया था कर्जमाफी का ऐलान

कांग्रेस के लिए शुभ घड़ी ये भी है कि छत्तीसगढ़ से राहुल गांधी ने किसानों की कर्जमाफी का ऐलान किया और बीजेपी नीत रमन सरकार का सूपड़ा साफ हो गया. ठीक वैसे ही कांग्रेस को भरोसा है कि न्यूनतम आय की गारंटी देकर छत्तीसगढ़ में किसानों-मजदूरों का दिल जीता जा सकता है. तभी राहुल गांधी ने पूरे दमखम से कहा कि "कांग्रेस ने कर्जमाफी, जमीन वापसी का वादा पूरा किया. पैसे की कोई कमी नहीं है. हम दो हिंदुस्तान नहीं चाहते. बीजेपी दो हिंदुस्तान बनाना चाहती है. एक हिंदुस्तान उद्योगपतियों का, जहां सब कुछ मिल सकता है और दूसरा गरीब किसानों का हिंदुस्तान, जहां कुछ नहीं मिलेगा, सिर्फ 'मन की बात' सुनने को मिलेगी." इन्हीं बातों को पुष्ट करने के लिए कांग्रेस अध्यक्ष कई महीनों से देश के कोने-कोने में घूमकर लोगों को बताने की कोशिश कर रहे हैं कि मौजूदा मोदी सरकार गरीब विरोधी है जबकि कांग्रेस गरीबों-मजदूरों की हितैषी है.

आगे क्या करेगी कांग्रेस?

राहुल गांधी ने छत्तीसगढ़ के मंच से आमदनी गारंटी की बात कर अपनी चुनावी फिल्म का ट्रेलर दिखा दिया है. आगे तय है कि पार्टी अपने घोषणा पत्र में गारंटी योजना लागू करने का ऐलान करेगी और बताएगी कि यह गरीबों की दशा बदलने वाला क्रांतिकारी कदम होगा. भले आप कह लें कि पार्टियों की घोषणाओं में हवा-हवाई बातें ज्यादा होती हैं जिन पर लोग भरोसा कम और सवाल ज्यादा उठाते हैं. मगर हाल में बीते विधानसभा चुनावों का लब्बोलुआब यही है कि घोषणाएं अगर गंभीर हों, गरीब-गुरबा की संवेदना को छूने वाली हों तो लोग भरोसा करते हैं और पार्टियों को वोट मिलते हैं. लिहाजा कांग्रेस अगर गारंटी योजना घोषणा पत्र में लाती है तो इसमें कोई हैरत नहीं.

क्यों पिछड़ गई मोदी सरकार?

सवाल है कि जो ऐलान आज राहुल गांधी कर रहे हैं, उसमें मोदी सरकार कैसे पिछड़ गई? यह यक्ष प्रश्न इसलिए भी गंभीर है क्योंकि 2016-17 की आर्थिक समीक्षा में सार्वभौमिक मूलभूत आय या यूनिवर्सल बेसिक इनकम (यूबीआई) का विचार सामने रखा गया था. आज की तारीख से जोड़ें तो दो साल पहले यह अवधारणा मोदी सरकार के दिमाग में थी लेकिन इसमें कहां चूक हुई, यह विचार-विमर्श का विषय है. अब मोदी सरकार यूबीआई को आगे बढ़ाती भी है तो उसपर 'कॉपीकैट' का चस्पा लगेगा और यही कहा जाएगा कि कांग्रेस का विचार आगे बढ़ाने में मोदी सरकार माहिर है.

दिलचस्प बात ये भी है कि 2016-17 की आर्थिक समीक्षा में यूबीआई की बात करते हुए ‘यूनिवर्सल बेसिक इनकमः अ कन्वर्सेशन विद एंड विदइन द महात्मा’ शीर्षक वाला एक पूरा चैप्टर इसमें जोड़ा गया था और याद दिलाया गया था कि अति गरीब लोगों के हितों की रक्षा करना राष्ट्र राज्य की जिम्मेदारी है जिसमें ऐसे कदम लाभदायक होंगे.

कांग्रेस और राहुल गांधी से कुछ सवाल

इसमें कोई दो राय नहीं कि कांग्रेस और राहुल गांधी की झंडाबरदारी में यूनिवर्सल बेसिक इनकम यानी यूबीआई शुरू होती है तो इससे लोगों में अच्छा संकेत जाएगा लेकिन इसे अमली जामा पहनाने का साधन क्या होगा? इस योजना का ढांचा कुछ ऐसा है कि गरीबों के खाते में एक न्यूनतम राशि ट्रांसफर की जाएगी. अब सवाल है कि कांग्रेस जब जनधन खाते और प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (डीबीटी) जैसी योजनाओं को कोसती रही है, फिर वह यूबीआई को धरातल पर कैसे उतार पाएगी? क्या देश में फिर नए बैंक खाते खोलने के दौर शुरू होंगे, क्या डीबीटी से इतर कोई नया सिस्टम बनेगा? अगर यह सब हो भी जाता है तो उस भ्रष्टाचार पर अंकुश कैसे लगेगा जिसकी चर्चा मनरेगा में होती है. क्या लोग मनरेगा की तरह काम-धाम छोड़ कर खैरात पर निर्भर नहीं होंगे? अगर मुफ्त खाते में पैसे आ जाएं तो बिना मेहनत मजदूरी किए शराब पीने का चलन फिर नहीं बढ़ेगा और महिलाएं जो मजदूरी करती हैं, उनके घर बैठने का सिलसिला शुरू नहीं होगा?

Tuesday, January 22, 2019

3 में से सिर्फ 1 किसान को मिलता है कर्जमाफी का फायदा, चौंका देगी ये रिपोर्ट

राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में सत्तारूढ़ पार्टी भाजपा की विधानसभा चुनावों में हार और बीते वर्ष देश के कई हिस्सों में किसान आंदोलन के चलते कृषि क्षेत्र की चुनौतियां राष्ट्रीय मुद्दा बना. यह जरूरी भी था क्योंकि कृषि क्षेत्र देश में कुल रोजगार का 49 फीसदी है और देश की लगभग 70 फीसदी जनसंख्या इसपर आधारित है.

इस सच्चाई के बावजूद कृषि क्षेत्र हाशिए पर रहा है. वहीं मौजूदा समय में भी ये मुद्दा राजनीतिक लाभ और लोकलुभावन नीतियों के चलते किसान कर्जमाफी, अधिक न्यूनतम समर्थन मूल्य और हाल ही में तेलंगाना के रायथू बंधु स्कीम इर्दगिर्द सीमित है. 

हमें समझने की जरूरत है कि किसानों की समस्या रातों-रात नहीं पैदा हुई. नीति आयोग की 2017 की रिपोर्ट, किसानों की आमदनी को दोगुनी करने की पहल समेत कई ऐसी समीक्षा से साफ कि किसानों की समस्या 1991-92 में शुरू हुई. इस समय तक दोनों कृषि और गैर-कृषि क्षेत्रों में समान स्तर पर विकास हो रहा था.

जानें, किसानों को इस भंवर से निकालने के लिए क्या किया गया है.

कर्जमाफी से कुछ किसानों को फायदा, भूमिहीन के लिए बेअसर

कर्जमाफी किसी बिमारी का इलाज नहीं बल्कि कुछ किसानों को तत्काल प्रभाव से राहत पहुंचाने का एक जरिया है. इसका फायदा सिर्फ उन किसानों को मिलता है जिन्होंने संस्थागत कर्ज लिए हैं. पिछला एनएसएसओ सर्व 2013 के मुताबिक देश में 52 फीसदी कृषि परिवार कर्ज में डूबे हैं और इसमें महज 60 फीसदी परिवारों ने किसी संस्था से कर्ज लिया है. लिहाजा, साफ है कि महज 31 फीसदी (52 फीसदी का 60 फीसदी) कृषि परिवारों को कर्जमाफी का फायदा पहुंचने की उम्मीद है.

कमलनाथ ने 'इंडिया टुडे' से बातचीत में कहा, 'बीजेपी मध्य प्रदेश में ऑपरेशन लोटस का प्रयास कर रही है.' उन्होंने कहा कि कांग्रेस के पांच विधायकों से बीजेपी ने संपर्क कर प्रलोभन देने का प्रयास किया था. इसकी जानकारी इन विधायकों ने अपने मुख्यमंत्री को दी है. मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि बीजेपी कांग्रेसी विधायकों को प्रलोभन देकर उन्हें तोड़ने की कोशिश कर रही है ताकि उनकी सरकार को गिराया जा सके.

कमलनाथ ने हालांकि अपने सरकार के प्रति भरोसा जताया है और कहा कि उनकी सरकार को कोई खतरा नहीं है. उन्होंने यह भी दावा किया कि बीजेपी के पांच विधायक उनके संपर्क में हैं. बीजेपी के ये विधायक अपनी पार्टी में अपने भविष्य को लेकर आशंकित हैं. कमलनाथ ने कहा कि यदि बीजेपी उनके विधायकों को तोड़ने का प्रयास करती है तो वह भी वही करेंगे.

कर्नाटक का संकट

बता दें कि कर्नाटक में कांग्रेस-जेडीएस गठबंधन की सरकार पर उस समय संकट के बादल मंडराने लगे थे, जब दो विधायकों ने सरकार से अपना समर्थन वापस लेने की घोषणा की थी. इसके बाद सवाल उठने लगे थे कि सात महीने पहले कर्नाटक के मुख्यमंत्री बने जेडीएस के एचडी कुमारस्वामी की सरकार क्या चल पाएगी. असल में, कांग्रेस के कुछ असंतुष्ट विधायकों के मुंबई में बीजेपी नेताओं के संपर्क में होने की सुर्खियों के बाद कयासबाजी का दौर शुरू हो गया था और कर्नाटक में कांग्रेस-जेडीएस सरकार को लेकर सवाल उठने लगे थे. कहा जाने लगा था कि बीजेपी कर्नाटक में ऑपरेशन लोटस चला रही है जिसके तहत वह कांग्रेस के असंतुष्ट विधायकों को तोड़कर अपना सरकार बनाना चाहती है. वहीं एचडी कुमारस्वामी को सामने आना पड़ा और यह कहना पड़ा कि उनकी सरकार को कोई खतरा नहीं है.

Thursday, January 10, 2019

भारतीय टीम के पास वनडे रैंकिंग में इंग्लैंड के करीब पहुंचने का मौका

विराट कोहली और तेज गेंदबाज जसप्रीत बुमराह ICC वनडे रैंकिंग में व्यक्तिगत सूची में शीर्ष पर कायम हैं, लेकिन भारत अगर अपने अगले आठ वनडे मुकाबले जीत लेता है, तो वह टीम रैंकिंग में पहले स्थान पर चल रही इंग्लैंड से महज एक अंक पीछे रह जाएगा. भारत को ऑस्ट्रेलिया से तीन और न्यूजीलैंड से पांच वनडे खेलने हैं जिससे वह 125 अंक तक पहुंच जाएगा और इंग्लैंड से केवल एक अंक पीछे रहेगा, लेकिन ऐसा तभी होगा जब वह अपने सभी आठ मैचों में जीत हासिल कर लेगा जबकि पाकिस्तान को उन्हें पछाड़ने के लिए दक्षिण अफ्रीका को 5-0 से हराना होगा.

इंग्लैंड की टीम तालिका में 126 अंक लेकर शीर्ष पर चल रही है जबकि इस समय भारतीय टीम 121 अंक लेकर दूसरे स्थान पर चल रही है. बल्लेबाजी सूची में कोहली (एक) और रोहित शर्मा (दो) ने अपना स्थान कायम रखा है जबकि बुमराह गेंदबाजों की रैंकिंग में अफगानिस्तान के राशिद खान (दूसरे) और टीम के अपने साथी कुलदीप यादव (तीसरे) से काफी आगे हैं. अन्य भारतीयों में बल्लेबाज शिखर धवन नौंवें स्थान पर हैं जबकि लेग स्पिनर युजवेंद्र चहल इंग्लैंड के आदिल राशिद के साथ संयुक्त छठे स्थान पर हैं.

पंड्या के महिलाओं पर कमेंट को लेकर हरकत में आई BCCI, भेजा नोटिस

वनडे टीम रैंकिंग में न्यूजीलैंड ने श्रीलंका को शिकस्त देकर अपना तीसरा स्थान कायम रखा है. उन्होंने एक अंक हासिल किया जिससे उनके 113 अंक हो गए जबकि श्रीलंका अपने आठवें स्थान पर बना हुआ है, लेकिन वह एक अंक गंवा चुका है जिससे उसके 78 अंक हैं. आपको बता दें कि टीम इंडिया ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ तीन मैचों की वनडे सीरीज का पहला मुकाबला 12 जनवरी को सिडनी में खेलेगी.

सीरीज का दूसरा वनडे एडिलेड में 15 जनवरी को खेला जाएगा और आखिरी वनडे 18 जनवरी को मेलबर्न में खेला जाएगा. टेस्ट में कंगारुओं को पीटने वाली विराट ब्रिगेड के पास वनडे सीरीज जीतकर इतिहास रचने का मौका है. विराट कोहली अगर टीम इंडिया को वनडे सीरीज में भी जीत दिलाते हैं तो वह भारत के पहले ऐसे कप्तान बन जाएंगे जिन्होंने ऑस्ट्रेलिया की धरती पर एक ही दौरे में टेस्ट और बाइलैटरल (द्विपक्षीय) वनडे सीरीज में जीत दर्ज की होगी.

जब नौकरी ही नहीं तो देंगे क्या?

वहीं अपना पक्ष रखते हुए सिब्बल ने कहा कि देश में जितनी नौकरी पैदा नहीं हो रही उससे ज्यादा नौकरी खत्म हो रही है और यह डिजिटल होते भारत की सच्चाई है. सिब्बल ने बताया कि 2001-2019 तक कुल नौकरी 7.3 फीसदी रही और इस हिसाब से सरकार द्वारा नई नौकरी प्रति वर्ष 0.4 फीसदी पैदा की गई. लिहाजा, नई नौकरी और खत्म होती पुरानी नौकरी की ऐसी स्थिति के बीच किस नौकरी को बतौर आरक्षण सरकार देने जा रही है. आंकड़ों का हवाला देते हुए सिब्बल ने कहा कि मोदी सरकार ने अपने कार्यकाल में 45,000 नौकरी दी. लिहाजा, क्या वह अब 10 फीसदी आरक्षण का प्रावधान महज 4,500 लोगों को नौकरी देने के लिए कर रहे हैं.

गरीब नहीं, सामान्य वर्ग की 99 फीसदी आबादी को मिलेगा 10 फीसदी आरक्षण!

सिब्बल ने कहा कि देश नई नौकरी नहीं पैदा कर रहा है. इस देश को आरक्षण नहीं नौकरी चाहिए और नौकरी सिर्फ विकास से आएगी. 7.3 फीसदी की दर से ग्रोथ है फिर भी नौकरी नहीं पैदा हो रही है. सीबीआई, ईडी जैसी जांच एजेंसी को सबके पीछे लगा दिया है तो निवेश कौन और कैसे लाएगा. लिहाजा, सरकार बताए कि उनके पास क्या आंकड़ा है. आखिर क्यों सरकार संविधान में ये संशोधन लेकर आई है. सरकार साफ करे कि क्या संविधान में संशोधन करने का यह तरीका सही है? सिब्बल ने कहा कि जब देश में एससी, एसटी और ओबीसी को ही आरक्षण के मुताबिक नौकरी नहीं दी जा पा रही है तो वह अब 10 फीसदी सामान्य क्ष्रेणी को नौकरी देने का ऐलान कर क्या करने जा रही है? सिब्बल ने कहा कि महज संशोधन बिल लाकर मोदी सरकार बेहद खुश हो रही है लेकिन एक सच्चाई से वह मुंह मोड़ रही है कि असली खुशी जनता को मिलनी चाहिए और क्या उनके इस बिल से जनता .

Thursday, January 3, 2019

रात में 2:30 बजे अचानक फट गया फोन, जिंदा जल गया 60 साल का बुजुर्ग; ऐसी गलती न करें आप

राजस्थान के चित्तौड़गढ़ में फोन के फटने से एक बुजुर्ग की मौत का मामला सामने आया है। दरअसल, जिले के नेतावलगढ़ पाछली गांव के रहने वाले 60 साल के किशोर सिंह रात में मोबाइल फोन रखकर सो रहे थे, लेकिन रात में अचानक फोन की बैटरी फट गई और ब्लास्ट हो गया। ब्लास्ट की वजह से सबसे पहले बुजुर्ग के कपड़ों में आग लगी, जिससे पूरे शरीर में फैल गई, जिससे उनकी मौत हो गई।

कैसे हुआ हादसा?
दरअसल, किशोर सिंह गुरुवार रात को अपने बनियान की जेब में फोन रखकर सो रहे थे। उन्हें ये फोन किसी सरकारी योजना के तहत मिला था। तभी रात के 2:30 बजे अचानक फोन की बैटरी में फट गई और ब्लास्ट हो गया। इससे उनके कपड़ों में आग लग गई और देखते ही देखते उनका शरीर आग में झुलस गया। उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाया गया, लेकिन वहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

5 सेफ्टी टिप्स : फोन साथ रखकर न सोएं
फोन को कभी भी तकिए के नीचे रखकर न सोएं, इससे फोन का टेंपरेचर बढ़ जाता है और प्रेशर भी बनता है, जिससे फोन फटने या हीट होने की आशंका बढ़ जाती है।

मोबाइल फोन को कभी भी शर्ट या स्वेटर की ऊपरी जेब में न रखें। इससे न सिर्फ रेडिएशन का खतरा रहता है बल्कि ब्लास्ट होने पर स्वेटर या शर्ट तेजी से आग पकड़ते हैं।

रातभर के लिए कभी भी फोन को चार्जिंग पर न लगाएं, इससे भी फोन के ब्लास्ट होने का खतरा बढ़ जाता है। इसके अलावा चार्जिंग के दौरान फोन के आसपास ऐसी चीजें न रखें, जो आसानी से आग पकड़ती हों जैसे- कपड़े या बेडशीट।

कभी भी डुप्लीकेट चार्जर या एडाप्टर का इस्तेमाल न करें। हमेशा ओरिजनल चार्जर से ही फोन को चार्ज करें। इसके अलावा फोन की बैटरी खराब हो गई है, तो ओरिजनल बैटरी का ही इस्तेमाल करें। डुप्लीकेट बैटरी का इस्तेमाल करने से बचें, क्योंकि ये कभी भी फट सकती हैं।

गाड़ी के डैशबोर्ड या ऐसी जगह रखकर कभी चार्ज न करें, जहां सूरज की रोशनी सीधे आती हो। इसके अलावा फोन को हमेशा कवर या केस निकालने के बाद ही चार्जिंग पर लगाएं, ताकि फोन गर्म न हो। अगर फोन जल्दी या ज्यादा गर्म होता है तो उसे सर्विस सेंटर पर दिखाएं।