दिल्ली हाईकोर्ट ने 3 जुलाई 1995 को पूरे देश को हिलाकर रख देने वाले नैना साहनी तंदूरकांड के दोषी सुशील शर्मा को बड़ी राहत दी है. अदालत ने बहुचर्चित तंदूर कांड के दोषी सुशील शर्मा को फौरन रिहा करने का आदेश दिया है. इससे पहले साल 2000 में ट्रायल कोर्ट ने सुशील शर्मा को इस जघन्य अपराध के लिए फांसी की सजा सुनाई थी, जिसे हाईकोर्ट ने बरकरार रखा था. हालांकि बाद में सुप्रीम कोर्ट ने इसे उम्र कैद में तब्दील कर दिया था.
आपको बता दें कि यह दिल दहला देने वाली वारदात दिल्ली के गोल मार्केट स्थित सरकारी फ्लैट नंबर 8/2A की है, जहां सुशील शर्मा ने अपनी पत्नी नैना साहनी की हत्या कर तंदूर में शव को जला दिया था. शर्मा दिल्ली युवा कांग्रेस का पूर्व अध्यक्ष है.
56 वर्षीय सुशील शर्मा ने दिल्ली हाईकोर्ट में लगाई अपनी याचिका में दावा किया था कि वो 23 साल से जेल में है और अगर माफी की अवधि भी इसमें जोड़ दें, तो साढ़े 29 साल से वो जेल में बंद है. इसी आधार पर उसने रिहाई की मांग की थी. पिछली सुनवाई में हाईकोर्ट ने दिल्ली सरकार से पूछा था कि 29 साल की कैद के बाद भी अभी तक सुशील शर्मा को रिहा क्यों नहीं किया गया?
इस मामले में सुशील शर्मा की अर्जी Sentence Review Board और दिल्ली सरकार ने खारिज कर दी थी, जिसके बाद उसने दिल्ली हाईकोर्ट में अर्जी दाखिल कर दी थी. इस फैसले का असर अब बाकी मामलों पर भी पड़ेगा, जिसमें कैदियों ने अपनी सजा तो पूरी कर ली है, लेकिन उन्हें अभी तक रिहा नहीं किया गया है.
ऐसे हुआ था तंदूर कांड का खुलासा
जब सुशील शर्मा अपनी पत्नी के शव को तंदूर में डालकर भून रहा था, तभी मक्खन की वजह से तंदूर से उठती आग की लपटें और धुआं रेस्तरां के बाहर दिखने लगा. इस बीच सब्जी बेचने वाली एक महिला अनारो की नजर इस आग और धुएं पर पड़ी. पहले तो अनारो ने सोचा कि शायद रेस्तरां में आग लग गई है और वो शोर मचाने लगी. इसको सुनकर आसपास गश्त कर रहे दिल्ली पुलिस के सिपाही अब्दुल नजीर, अनारो के पास आए. इसके बाद आग की लपटों और धुएं को देखकर रेस्तरां की तरफ भागे. जब सिपाही नजीर वहां पहुंचे, तो उनके होश उड़ गए.
अवैध संबंध के शक होने पर की थी हत्या
सुशील शर्मा ने अपनी पत्नी नैना साहनी का कत्ल अवैध संबंध के शक होने पर किया था. दिल दहला देने वाली इस वारदात की जानकारी मिलने के बाद तत्कालीन दिल्ली यूथ कांग्रेस के नेता मतलूब करीम सामने आए और पहली बार यह खुलासा किया कि तंदूर में जिस महिला को भूना गया, उसका नाम नैना साहनी था. वह सुशील शर्मा की पत्नी थी. वहीं, वारदात को अंजाम देने के बाद सुशील शर्मा लापता हो गया था. हालांकि बाद में पुलिस ने सुशील शर्मा को गिरफ्तार कर लिया था.
Friday, December 21, 2018
Friday, December 7, 2018
प्रियंका ने वेडिंग लहंगे में लिखवाया निक जोनस का नाम
जोधपुर के आलीशान उम्मेद भवन में 1-2 दिसंबर को प्रियंका चोपड़ा-निक जोनस की वेडिंग हुई. हिंदू वेडिंग में प्रियंका-निक ने सब्यासाची के आउटफिट पहने थे. एक्ट्रेस ने रेड कलर का खूबसूरत लहंगा पहना था. ये वेडिंग आउटफिट काफी खास था. जानें क्यों.
दरअसल, प्रियंका के इस वेडिंग लहंगे में निक जोनस का नाम लिखा था. इसका खुलासा लहंगे के मेकिंग वीडियो से हुआ है. सब्यासाची ने अपने इंस्टा अकाउंट पर प्रियंका के रेड लहंगे का मेकिंग वीडियो शेयर किया है.
एक्ट्रेस ने लहंगे को पसर्नल टच दिया. लहंगे में उन्होंने अपने पार्टनर का नाम लिखवाया. लहंगे में रेड थ्रेड से निकोलस जोनस लिखा गया. वीडियो में दिखाया गया कि प्रियंका का ये लहंगा हैंड एम्ब्रॉयडेड है. इस पर रेड क्रिस्टल धागों से कारीगरी की गई है.
बता दें, इस लहंगे को बनाने के लिए कोलकाता के 110 कारीगरों ने काम किया है. लहंगे को बनाने में पूरे 3720 घंटे लगे हैं. वहीं निक जोनस के लुक की बात करें तो उन्होंने क्रीम कलर की सिल्क शेरवानी पहनी. शेरवानी को उन्होंने हैंड एम्ब्रॉयडेड चिकन दुप्पटे से टीमअप किया है. निक ने शेरवानी के साथ मैचिंग पगड़ी, गोल्डन शूज भी पहने.
यदि बाढ़ की विभीषिका के दृश्यों को छोड़ दिया जाए तो 70 फ़ीसदी फिल्म में कमजोर कड़ियां ही दिखी हैं. मानव त्रासदियों को फिल्मों के जरिये भुनाने का रिवाज नया नहीं है, लेकिन ऐसी फिल्मों में कहानी और संवेदनाएं ही 'हीरो' होती हैं. फ़िल्म केदारनाथ में कहानी बेहद घिसी-पिटी और कमजोर है. एक युगल की साधारण प्रेम कहानी, जिनका रिश्ता उनके परिवार को मंजूर नहीं. मानो सिर्फ केदारनाथ की भीषण बाढ़ दिखाने के लिए ही एक साधारण सी कहानी का चुनाव कर लिया गया हो.
सुशांत ने कहानी के मुताबिक न्याय करने की कोशिश की, लेकिन उनका गुस्सा और मुस्कान हर फिल्म में एक ही जैसी होती है. सारा स्क्रीन पर अपना असर दिखाने की कोशिश में कई मर्तबा ओवर एक्टिंग करती नजर आती हैं. उनकी अदाकारी वास्तविकता के बजाय 'अदाकारी' ही मालूम पड़ती है.
इस तरह के धार्मिक वातावरण और प्राकृतिक नजारों के बीच संगीत को और अधिक निखारा जा सकता था. कहानी में मुस्लिमों के प्रति दुर्भावना, पूर्वग्रह और भेदभाव दिखाने की कोशिश की, लेकिन कई बार ये बेवजह और अस्वाभाविक लगता है. अधिक लाभ कमाने के मकसद से वादी में कंस्ट्रक्शन को बाढ़ की वजह दिखाने की कोशिश की गई, लेकिन ये तथ्य मजबूती से स्थापित नहीं हो पाता. फिल्म के संवाद बहुत प्रभावी और नायाब नहीं हैं, जिनकी भरपाई एक्टर्स को अपने एक्सप्रेशन्स से करनी पड़ती है.
दरअसल, प्रियंका के इस वेडिंग लहंगे में निक जोनस का नाम लिखा था. इसका खुलासा लहंगे के मेकिंग वीडियो से हुआ है. सब्यासाची ने अपने इंस्टा अकाउंट पर प्रियंका के रेड लहंगे का मेकिंग वीडियो शेयर किया है.
एक्ट्रेस ने लहंगे को पसर्नल टच दिया. लहंगे में उन्होंने अपने पार्टनर का नाम लिखवाया. लहंगे में रेड थ्रेड से निकोलस जोनस लिखा गया. वीडियो में दिखाया गया कि प्रियंका का ये लहंगा हैंड एम्ब्रॉयडेड है. इस पर रेड क्रिस्टल धागों से कारीगरी की गई है.
बता दें, इस लहंगे को बनाने के लिए कोलकाता के 110 कारीगरों ने काम किया है. लहंगे को बनाने में पूरे 3720 घंटे लगे हैं. वहीं निक जोनस के लुक की बात करें तो उन्होंने क्रीम कलर की सिल्क शेरवानी पहनी. शेरवानी को उन्होंने हैंड एम्ब्रॉयडेड चिकन दुप्पटे से टीमअप किया है. निक ने शेरवानी के साथ मैचिंग पगड़ी, गोल्डन शूज भी पहने.
यदि बाढ़ की विभीषिका के दृश्यों को छोड़ दिया जाए तो 70 फ़ीसदी फिल्म में कमजोर कड़ियां ही दिखी हैं. मानव त्रासदियों को फिल्मों के जरिये भुनाने का रिवाज नया नहीं है, लेकिन ऐसी फिल्मों में कहानी और संवेदनाएं ही 'हीरो' होती हैं. फ़िल्म केदारनाथ में कहानी बेहद घिसी-पिटी और कमजोर है. एक युगल की साधारण प्रेम कहानी, जिनका रिश्ता उनके परिवार को मंजूर नहीं. मानो सिर्फ केदारनाथ की भीषण बाढ़ दिखाने के लिए ही एक साधारण सी कहानी का चुनाव कर लिया गया हो.
सुशांत ने कहानी के मुताबिक न्याय करने की कोशिश की, लेकिन उनका गुस्सा और मुस्कान हर फिल्म में एक ही जैसी होती है. सारा स्क्रीन पर अपना असर दिखाने की कोशिश में कई मर्तबा ओवर एक्टिंग करती नजर आती हैं. उनकी अदाकारी वास्तविकता के बजाय 'अदाकारी' ही मालूम पड़ती है.
इस तरह के धार्मिक वातावरण और प्राकृतिक नजारों के बीच संगीत को और अधिक निखारा जा सकता था. कहानी में मुस्लिमों के प्रति दुर्भावना, पूर्वग्रह और भेदभाव दिखाने की कोशिश की, लेकिन कई बार ये बेवजह और अस्वाभाविक लगता है. अधिक लाभ कमाने के मकसद से वादी में कंस्ट्रक्शन को बाढ़ की वजह दिखाने की कोशिश की गई, लेकिन ये तथ्य मजबूती से स्थापित नहीं हो पाता. फिल्म के संवाद बहुत प्रभावी और नायाब नहीं हैं, जिनकी भरपाई एक्टर्स को अपने एक्सप्रेशन्स से करनी पड़ती है.
Tuesday, December 4, 2018
सियासी मोहरा था आनंदपाल, अब वसुंधरा के लिए मुसीबत?
राजस्थान में चुनाव नजदीक आने के साथ ही पिछले साल जून में पुलिस एनकाउंटर में मारे गए कुख्यात बदमाश आनंदपाल सिंह की भी चुनावी रण में एंट्री हो गई है. दरअसल अब आनंदपाल की मां निर्मल कंवर और बेटी योगिता बीजेपी के खिलाफ प्रचार कर रही हैं और कांग्रेस का साथ दे रही हैं. बता दें कि आनंदपाल सिंह के मामले को लेकर राजपूत समाज की बीजेपी से खास नाराजगी रही है.
आनंदपाल के एनकाउंटर का विरोध कर रहा रावणा राजपूत समाज सरकार के खिलाफ मोर्चा खोले हुए है. पहले खबरें आ रही थीं कि आनंदपाल की मां निर्मल कंवर नागौर के डीडवाना या लाडनूं से चुनाव मैदान में उतर सकती हैं. कई राजपूत संगठनों का आरोप रहा है कि सरकार चाहती तो आनंदपाल जिंदा पकड़ा जा सकता था, लेकिन ऐसा होने की स्थिति में कई बड़े चेहरों के कच्चे चिठ्ठे खुलने का डर था इसलिए उसे मरवा दिया गया.
असल में आनंदपाल का एनकाउंटर अब वसुंधरा सरकार के लिए मुसीबत बन गया है. इस एनकाउंटर की वजह से ही रावणा राजपूत समाज पहले ही सरकार से नाराज चल रहा है. लोकसभा के उपचुनावों में भी हुई बीजेपी की हार में राजपूत समाज की अहम भूमिका मानी जा रही थी, क्योंकि अजमेर लोकसभा क्षेत्र में रावणा राजपूत 65 हजार की संख्या में हैं. वहीं कांग्रेस ने रावणा राजपूत के वोट हासिल करने के लिए पहली ही सूची में 2 रावणा राजपूत के नाम शामिल कर दिए थे.
राजस्थान: BJP-कांग्रेस से नहीं थीं पहली महिला MLA, ऐसे जीता था चुनाव
राजस्थान में राजपूत एक प्रभावशाली जाति रही है और प्रदेश की आबादी का 10-12 फीसदी हिस्सा राजपूतों का ही है. वहीं आंनदपाल के जिले नागौर में कुल 10 विधानसभा सीट हैं, जिसमें करीब 7 सीटों पर राजपूत मतदाता निर्णायक साबित होता है. अब यहां के रावणा राजपूत समुदाय के लोग भी बीजेपी का विरोध कर रहे हैं, जिनका कहना है, 'हम एक साथ बीजेपी के खिलाफ लड़ रहे हैं. चाहे राजपूत हो गया रावणा राजपूत, हम एक साथ बीजेपी को हराने के लिए काम कर रहे हैं. हमें लग रहा है कि बीजेपी राजपूतों के खिलाफ है.' हालांकि अब आनंदपाल का मामला सीबीआई के हाथ में है.
क्या है आनंदपाल की कहानी?
प्रदेश के शेखावाटी और मारवाड़ में आजादी के बाद जाट कांग्रेस के समर्थक बन गए थे और राजपूत कांग्रेस के खिलाफ बोलने लगे थे. वहीं जाटों ने राजनीति में अपने पांव पसार लिए थे और प्रदेश में राजनीति में अहम स्थान रखने लगे. कुछ सालों बाद जाटों की दबंगई खत्म करने और राजपूतों में अपना प्रभाव जमाने की कोशिश हुई. उस दौरान राजपूतों में आनंदपाल सिंह अपराधी के रूप में उभरा और आनंदपाल सिंह ने दिनदहाड़े जाट नेता जीवनराम गोदारा की हत्या कर दी.
'वंश' दिलाएगा वोट, राजस्थान में बेटा-बेटी के सहारे हैं बीजेपी-कांग्रेस
आनंदपाल की गुंडई ने जातीय रूप ले लिया था और सारा मामला राजपूत बनाम जाट में तब्दील हो गया था. आनंदपाल सिंह पढ़ने लिखने में ठीक था और उसने बीएड किया. आनंदपाल को बीजेपी नेताओं का आनंदपाल सिंह को राजनीतिक संरक्षण भी मिला. उसके बाद भी आनंदपाल ने अपनी गुंडागर्दी खत्म नहीं की और अपनी गुंडई के दम पर आगे बढ़ता गया.
हालांकि आनंदपाल सिंह राजनीति में जाना चाहता था और साल 2000 में जिला पंचायत का चुनाव जीता. उसके बाद प्रधान के चुनाव में निर्दलीय चुनाव लड़ा और 2 वोट से हार गया. उसके बाद वह राजनीति में भी अन्य नेताओं की नजर में आ गया. धीरे-धीरे आनंदपाल सिंह के गैंग ने शेखावाटी और मारवाड़ के बड़े हिस्से में शराब तस्करी और जमीन के अवैध कब्जे में अपनी धाक जमा ली. उस पर 5 लाख का इनाम भी घोषित किया गया था. उसके खिलाफ कई 20 से अधिक मामले दर्ज थे.
वहीं आनंदपाल का सियासी मोहरे के रुप में भी इस्तेमाल किया गया है. साल 2013 के चुनाव विधानसभा चुनाव में आनंदपाल सिंह ने खुल कर यूनुस खान को चुनाव जिताने में मदद की. आनंदपाल की बदौलत राजस्थान सरकार में मंत्री रहे यूनुस खान ने वसुंधरा राजे के विरोधी नेताओं पर भी नियंत्रण पा लिया था. कई नेताओं ने आरोप लगाया है कि यूनुस खान जेल में बंद आनंदपाल से मिलने भी जाते थे. हालांकि बाद में आनंदपाल और नेताओं के रिश्तों में दरार आने लगी थी.
राजपूतों को आरोप रहा है कि बीजेपी के कुछ नेता भी चाहते थे कि आनंदपाल सिंह सरेंडर कर दे, लेकिन कुछ बीजेपी नेता इसके विरोध में थे. आनंदपाल के एनकाउंटर के बाद राजस्थान में राजपूत जाति ने उसे जातीय अस्मिता से जोड़ लिया है और अब राजपूत सरकार के विरोध में खुलकर सामने आ गए हैं.
आनंदपाल के एनकाउंटर का विरोध कर रहा रावणा राजपूत समाज सरकार के खिलाफ मोर्चा खोले हुए है. पहले खबरें आ रही थीं कि आनंदपाल की मां निर्मल कंवर नागौर के डीडवाना या लाडनूं से चुनाव मैदान में उतर सकती हैं. कई राजपूत संगठनों का आरोप रहा है कि सरकार चाहती तो आनंदपाल जिंदा पकड़ा जा सकता था, लेकिन ऐसा होने की स्थिति में कई बड़े चेहरों के कच्चे चिठ्ठे खुलने का डर था इसलिए उसे मरवा दिया गया.
असल में आनंदपाल का एनकाउंटर अब वसुंधरा सरकार के लिए मुसीबत बन गया है. इस एनकाउंटर की वजह से ही रावणा राजपूत समाज पहले ही सरकार से नाराज चल रहा है. लोकसभा के उपचुनावों में भी हुई बीजेपी की हार में राजपूत समाज की अहम भूमिका मानी जा रही थी, क्योंकि अजमेर लोकसभा क्षेत्र में रावणा राजपूत 65 हजार की संख्या में हैं. वहीं कांग्रेस ने रावणा राजपूत के वोट हासिल करने के लिए पहली ही सूची में 2 रावणा राजपूत के नाम शामिल कर दिए थे.
राजस्थान: BJP-कांग्रेस से नहीं थीं पहली महिला MLA, ऐसे जीता था चुनाव
राजस्थान में राजपूत एक प्रभावशाली जाति रही है और प्रदेश की आबादी का 10-12 फीसदी हिस्सा राजपूतों का ही है. वहीं आंनदपाल के जिले नागौर में कुल 10 विधानसभा सीट हैं, जिसमें करीब 7 सीटों पर राजपूत मतदाता निर्णायक साबित होता है. अब यहां के रावणा राजपूत समुदाय के लोग भी बीजेपी का विरोध कर रहे हैं, जिनका कहना है, 'हम एक साथ बीजेपी के खिलाफ लड़ रहे हैं. चाहे राजपूत हो गया रावणा राजपूत, हम एक साथ बीजेपी को हराने के लिए काम कर रहे हैं. हमें लग रहा है कि बीजेपी राजपूतों के खिलाफ है.' हालांकि अब आनंदपाल का मामला सीबीआई के हाथ में है.
क्या है आनंदपाल की कहानी?
प्रदेश के शेखावाटी और मारवाड़ में आजादी के बाद जाट कांग्रेस के समर्थक बन गए थे और राजपूत कांग्रेस के खिलाफ बोलने लगे थे. वहीं जाटों ने राजनीति में अपने पांव पसार लिए थे और प्रदेश में राजनीति में अहम स्थान रखने लगे. कुछ सालों बाद जाटों की दबंगई खत्म करने और राजपूतों में अपना प्रभाव जमाने की कोशिश हुई. उस दौरान राजपूतों में आनंदपाल सिंह अपराधी के रूप में उभरा और आनंदपाल सिंह ने दिनदहाड़े जाट नेता जीवनराम गोदारा की हत्या कर दी.
'वंश' दिलाएगा वोट, राजस्थान में बेटा-बेटी के सहारे हैं बीजेपी-कांग्रेस
आनंदपाल की गुंडई ने जातीय रूप ले लिया था और सारा मामला राजपूत बनाम जाट में तब्दील हो गया था. आनंदपाल सिंह पढ़ने लिखने में ठीक था और उसने बीएड किया. आनंदपाल को बीजेपी नेताओं का आनंदपाल सिंह को राजनीतिक संरक्षण भी मिला. उसके बाद भी आनंदपाल ने अपनी गुंडागर्दी खत्म नहीं की और अपनी गुंडई के दम पर आगे बढ़ता गया.
हालांकि आनंदपाल सिंह राजनीति में जाना चाहता था और साल 2000 में जिला पंचायत का चुनाव जीता. उसके बाद प्रधान के चुनाव में निर्दलीय चुनाव लड़ा और 2 वोट से हार गया. उसके बाद वह राजनीति में भी अन्य नेताओं की नजर में आ गया. धीरे-धीरे आनंदपाल सिंह के गैंग ने शेखावाटी और मारवाड़ के बड़े हिस्से में शराब तस्करी और जमीन के अवैध कब्जे में अपनी धाक जमा ली. उस पर 5 लाख का इनाम भी घोषित किया गया था. उसके खिलाफ कई 20 से अधिक मामले दर्ज थे.
वहीं आनंदपाल का सियासी मोहरे के रुप में भी इस्तेमाल किया गया है. साल 2013 के चुनाव विधानसभा चुनाव में आनंदपाल सिंह ने खुल कर यूनुस खान को चुनाव जिताने में मदद की. आनंदपाल की बदौलत राजस्थान सरकार में मंत्री रहे यूनुस खान ने वसुंधरा राजे के विरोधी नेताओं पर भी नियंत्रण पा लिया था. कई नेताओं ने आरोप लगाया है कि यूनुस खान जेल में बंद आनंदपाल से मिलने भी जाते थे. हालांकि बाद में आनंदपाल और नेताओं के रिश्तों में दरार आने लगी थी.
राजपूतों को आरोप रहा है कि बीजेपी के कुछ नेता भी चाहते थे कि आनंदपाल सिंह सरेंडर कर दे, लेकिन कुछ बीजेपी नेता इसके विरोध में थे. आनंदपाल के एनकाउंटर के बाद राजस्थान में राजपूत जाति ने उसे जातीय अस्मिता से जोड़ लिया है और अब राजपूत सरकार के विरोध में खुलकर सामने आ गए हैं.
Thursday, November 15, 2018
इस योजना के बारे में जरूरी बातें जानिए- बेटी कैसे बन सकती है करोड़पति
मोदी सरकार ने साल 2015 में बालिकाओं के लिए सुकन्या समृद्धि योजना (SSY) आरंभ की थी। इस योजना के जरिए आप अपनी बिटिया को 25 साल की आयु में करोड़पति भी बना सकते हैं। खास बात ये है कि इसके लिए आपको 14 साल तक ही एक तय रकम सुकन्या समृद्धि योजना के अकाउंट में जमा करानी होगी। ये रकम करीब एक करोड़ के एक चौथाई से भी कम होगी। यह राशि आप सालाना या मासिक तौर पर जमा कर सकते हैं। यह खाता बेटी के 21 साल के होने के बाद ही मैच्योर होगा। हालांकि, अगर वह 25 साल तक अविवाहित रहेगी तो भी उसे जमा राशि पर नियमानुसार ब्याज मिलता रहेगा।
फिलहाल ब्याज दर क्या?
सुकन्या समृद्धि योजना पर फिलहाल ब्याज दर 8.5 प्रतिशत है। इसका हर साल रिवीजन किया जाता है। सुकन्या समृद्धि योजना में एक साल में 1.5 लाख रुपए से ज्यादा जमा नहीं कराए जा सकते। इस योजना में 1 से लेकर 10 से कम उम्र की बेटियों का खाता खोला जा सकता है। अगर आप 12,500 या 10,000 रुपए प्रति महीना 14 साल तक जमा कराते हैं तो वर्तमान ब्याज दर के हिसाब से जब आपकी बेटी 21 साल की होगी तो उसे 7,799,280 रुपए मिलेंगे। और मान लीजिए कि वो 21 साल के बाद भी और पांच साल अविवाहित रहती है तो उसे 10,808,700 रुपए मिलेंगे। यानी 25 साल की आयु होने पर एक करोड़ रुपए से भी ज्यादा।
एक तरीका ये भी
मान लीजिए आप एक साल की अपनी बेटी के लिए हर महीने 10 हजार रुपए जमा करते हैं। वर्तमान ब्याज दर के हिसाब से जब वो 21 साल की होगी तो उसे 35 लाख रुपए मिलेंगे। इसके बाद मान लीजिए कि वो अगले 6 साल तक शादी नहीं करती तो वो जब 27 साल की होगी तो उसे 10,179,417 रुपए मिलेंगे। अब हिसाब लगाएं कि आप 14 साल में सिर्फ 1,680,000 रुपए ही जमा कर रहे हैं। SSY में एक साल में जमा करने की न्यूनतम राशि 250 रुपए है।
टैक्स में फायदा
सुकन्या समृद्धि योजना या SSY का सबसे बड़ा फायदा ये है कि इस खाते के मैच्योर होने पर भी आपको किसी तरह का टैक्स नहीं देना पड़ेगा। इसको आयकर कानून की धारा 80C के तहत कर मुक्त यानी टैक्स से छूट दी गई है। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, स्टेट बैंक ऑफ मैसूर, स्टेट बैंक ऑफ हैदराबाद, स्टेट बैंक ऑफ त्रावणकोर, स्टेट बैंक ऑफ बीकानेर एंड जयपुर और सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के अलावा और भी कई बैंकों में इस योजना के तहत खाता खोला जा सकता है।
नोट: जानकारी के लिए ऑनलाइन कंपाउंड इंटररेस्ट कैल्कुलेटर का इस्तेमाल किया गया। ब्याज दर हर साल परिवर्तित होती हैं। इसलिए खाता मैच्योर होने के वक्त मिलने वाली रकम उस रकम से अलग हो सकती है जो खबर में दी गई है।
फिलहाल ब्याज दर क्या?
सुकन्या समृद्धि योजना पर फिलहाल ब्याज दर 8.5 प्रतिशत है। इसका हर साल रिवीजन किया जाता है। सुकन्या समृद्धि योजना में एक साल में 1.5 लाख रुपए से ज्यादा जमा नहीं कराए जा सकते। इस योजना में 1 से लेकर 10 से कम उम्र की बेटियों का खाता खोला जा सकता है। अगर आप 12,500 या 10,000 रुपए प्रति महीना 14 साल तक जमा कराते हैं तो वर्तमान ब्याज दर के हिसाब से जब आपकी बेटी 21 साल की होगी तो उसे 7,799,280 रुपए मिलेंगे। और मान लीजिए कि वो 21 साल के बाद भी और पांच साल अविवाहित रहती है तो उसे 10,808,700 रुपए मिलेंगे। यानी 25 साल की आयु होने पर एक करोड़ रुपए से भी ज्यादा।
एक तरीका ये भी
मान लीजिए आप एक साल की अपनी बेटी के लिए हर महीने 10 हजार रुपए जमा करते हैं। वर्तमान ब्याज दर के हिसाब से जब वो 21 साल की होगी तो उसे 35 लाख रुपए मिलेंगे। इसके बाद मान लीजिए कि वो अगले 6 साल तक शादी नहीं करती तो वो जब 27 साल की होगी तो उसे 10,179,417 रुपए मिलेंगे। अब हिसाब लगाएं कि आप 14 साल में सिर्फ 1,680,000 रुपए ही जमा कर रहे हैं। SSY में एक साल में जमा करने की न्यूनतम राशि 250 रुपए है।
टैक्स में फायदा
सुकन्या समृद्धि योजना या SSY का सबसे बड़ा फायदा ये है कि इस खाते के मैच्योर होने पर भी आपको किसी तरह का टैक्स नहीं देना पड़ेगा। इसको आयकर कानून की धारा 80C के तहत कर मुक्त यानी टैक्स से छूट दी गई है। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, स्टेट बैंक ऑफ मैसूर, स्टेट बैंक ऑफ हैदराबाद, स्टेट बैंक ऑफ त्रावणकोर, स्टेट बैंक ऑफ बीकानेर एंड जयपुर और सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के अलावा और भी कई बैंकों में इस योजना के तहत खाता खोला जा सकता है।
नोट: जानकारी के लिए ऑनलाइन कंपाउंड इंटररेस्ट कैल्कुलेटर का इस्तेमाल किया गया। ब्याज दर हर साल परिवर्तित होती हैं। इसलिए खाता मैच्योर होने के वक्त मिलने वाली रकम उस रकम से अलग हो सकती है जो खबर में दी गई है।
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