जोधपुर के आलीशान उम्मेद भवन में 1-2 दिसंबर को प्रियंका चोपड़ा-निक जोनस की वेडिंग हुई. हिंदू वेडिंग में प्रियंका-निक ने सब्यासाची के आउटफिट पहने थे. एक्ट्रेस ने रेड कलर का खूबसूरत लहंगा पहना था. ये वेडिंग आउटफिट काफी खास था. जानें क्यों.
दरअसल, प्रियंका के इस वेडिंग लहंगे में निक जोनस का नाम लिखा था. इसका खुलासा लहंगे के मेकिंग वीडियो से हुआ है. सब्यासाची ने अपने इंस्टा अकाउंट पर प्रियंका के रेड लहंगे का मेकिंग वीडियो शेयर किया है.
एक्ट्रेस ने लहंगे को पसर्नल टच दिया. लहंगे में उन्होंने अपने पार्टनर का नाम लिखवाया. लहंगे में रेड थ्रेड से निकोलस जोनस लिखा गया. वीडियो में दिखाया गया कि प्रियंका का ये लहंगा हैंड एम्ब्रॉयडेड है. इस पर रेड क्रिस्टल धागों से कारीगरी की गई है.
बता दें, इस लहंगे को बनाने के लिए कोलकाता के 110 कारीगरों ने काम किया है. लहंगे को बनाने में पूरे 3720 घंटे लगे हैं. वहीं निक जोनस के लुक की बात करें तो उन्होंने क्रीम कलर की सिल्क शेरवानी पहनी. शेरवानी को उन्होंने हैंड एम्ब्रॉयडेड चिकन दुप्पटे से टीमअप किया है. निक ने शेरवानी के साथ मैचिंग पगड़ी, गोल्डन शूज भी पहने.
यदि बाढ़ की विभीषिका के दृश्यों को छोड़ दिया जाए तो 70 फ़ीसदी फिल्म में कमजोर कड़ियां ही दिखी हैं. मानव त्रासदियों को फिल्मों के जरिये भुनाने का रिवाज नया नहीं है, लेकिन ऐसी फिल्मों में कहानी और संवेदनाएं ही 'हीरो' होती हैं. फ़िल्म केदारनाथ में कहानी बेहद घिसी-पिटी और कमजोर है. एक युगल की साधारण प्रेम कहानी, जिनका रिश्ता उनके परिवार को मंजूर नहीं. मानो सिर्फ केदारनाथ की भीषण बाढ़ दिखाने के लिए ही एक साधारण सी कहानी का चुनाव कर लिया गया हो.
सुशांत ने कहानी के मुताबिक न्याय करने की कोशिश की, लेकिन उनका गुस्सा और मुस्कान हर फिल्म में एक ही जैसी होती है. सारा स्क्रीन पर अपना असर दिखाने की कोशिश में कई मर्तबा ओवर एक्टिंग करती नजर आती हैं. उनकी अदाकारी वास्तविकता के बजाय 'अदाकारी' ही मालूम पड़ती है.
इस तरह के धार्मिक वातावरण और प्राकृतिक नजारों के बीच संगीत को और अधिक निखारा जा सकता था. कहानी में मुस्लिमों के प्रति दुर्भावना, पूर्वग्रह और भेदभाव दिखाने की कोशिश की, लेकिन कई बार ये बेवजह और अस्वाभाविक लगता है. अधिक लाभ कमाने के मकसद से वादी में कंस्ट्रक्शन को बाढ़ की वजह दिखाने की कोशिश की गई, लेकिन ये तथ्य मजबूती से स्थापित नहीं हो पाता. फिल्म के संवाद बहुत प्रभावी और नायाब नहीं हैं, जिनकी भरपाई एक्टर्स को अपने एक्सप्रेशन्स से करनी पड़ती है.
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