Wednesday, July 24, 2019

VLC Media player में बड़ी खामी, करोड़ों यूजर्स हो सकते हैं प्रभावित

VLC Media Player दुनिया भर में काफी पॉपुलर है. लेकिन इसमें एक गंभीर खामी पाई गई है. रिसर्चर्स ने यूजर्स को अगाह किया है. इससे करोड़ों यूजर्स प्रभावित हो सकते हैं और उन्हें नुकसान भी हो सकता है. जर्मनी की एक फर्म CERT-Bund के सिक्योरिटी रिसर्चर्स ने कहा है कि उन्होंने VLC Media player के वीडियो प्लेयर में एक खामी ढूंढी है. इसका फायदा उठा कर हैकर्स यूजर्स के डिवाइस को ऐक्सेस कर सकते हैं.

इस सिक्योरिटी फर्म ने कहा है कि VLC Media Player के इस गंभीर खामी की वजह से रिमोट कोड एक्जिक्यूशन एनेबल होता है जिससे डेटा/फाइल्स और ओवरऑल सर्विस को हाइजैक किया जा सकता है. इसके जरिए डिवाइस का ऐक्सेस लेकर हैकर्स खतरनाक सॉफ्टवेयर भी इंजेक्ट कर सकते हैं. हालांकि अब तक ऐसा हुआ है.

VLC Media Player की ये दिक्कत Windows, Linux और Unix वर्जन में पाई गई है. हालांकि बताया गया है कि इससे macOS सुरक्षित हैं. Video LAN, ने इस इश्यू को माना है और कंपनी ने कहा है कि इसके पैच पर काम किया जा रहा है यानी इसे ठीक किया जा रहा है. वीडियो लैन VLC मीडिया प्लेयर की पेरेंट कंपनी है. कंपनी ने कहा है कि 60% कंप्लीट हो चुका है.

हालांकि Video LAN ने इस बात से साफ इनकार कर दिया है कि VLC Media Player  का ये बग VLC को क्रैश कर रहा है. लेकिन फिर भी आप फिलहाल VLC से MKV फाइल चलाने से बचें. कंपनी ने कहा है कि अब ऐसी कोई समस्या नहीं है.

गौरतलब है कि ये मीडिया प्लेयर फ्री है, फास्ट भी है. इस वजह से ये दुनिया भर में इसके काफी यूजर्स हैं और करोड़ों लोग इसे यूज करते हैं. इसलिए ये खामी ज्यादा लोगों को प्रभावित कर सकती है.

हालांकि कंपनी का कहना है कि इसे हटाने की जरूरत नहीं है. ये खामी मुख्य तौर पर MKV फाइल के साथ है जो वीडियो फाइल ही है. यानी अगर आप इंटरनेट से MKV फाइल डाउनलोड करके इसे VLC से चलाते हैं तो मुमकिन है आपका कंप्यूटर हैक हो जाए. लेकिन अब तक ऐसा कोई इंसिडेंट नहीं मिला है.

यूं तो इनर लाइन परमिट रूल पहले जम्मू-कश्मीर में भी लागू था, मगर श्यामा प्रसाद मुखर्जी के आंदोलन के बाद वहां परमिट सिस्टम खत्म हो गया. लेकिन, नागालैंड में यह नियम आज भी जारी है. अब यह मामला राष्ट्रीय स्तर पर बहस का विषय बनने लगा है.

हाल ही में बीजेपी नेता अश्निनी उपाध्याय इस मामले को सुप्रीम कोर्ट लेकर पहुंचे तो वहीं बीते 23 जुलाई को दो सांसदों ने भी लोकसभा में इनर लाइन परमिट सिस्टम के मुद्दे को उठाया. जिस पर सरकार ने कहा है कि भारतीय नागरिकों को  अरुणाचल प्रदेश, मिजोरम और दीमापुर को छोड़कर नगालैंड में यात्रा के लिए इनर लाइन परमिट की जरूरत होती है. दीमापुर के लिए इनर लाइन परमिट लागू करने के लिए राज्य सरकार के प्रस्ताव पर अभी विचार-विमर्श चल रहा है.

आंतरिक वीजा जैसा होता है इनर लाइन परमिट

देश में इस वक्त सिर्फ नागालैंड में ही इनर लाइन परमिट सिस्टम लागू है. बंगाल ईस्टर्न फ्रंटियर रेग्यूलेशन्स, 1873 के तहत यह व्यवस्था एक सीमित अवधि के लिए किसी संरक्षित, प्रतिबंधित क्षेत्र में दाखिल होने के लिए अनुमति देता है. नौकरी या फिर पर्यटन के लिए पहुंचने वालों को अनुमति लेनी जरूरी है. बताया जाता है कि गुलामी के दौर में ब्रिटिश सरकार ने इनर लाइन परमिट सिस्टम की शुरुआत की थी. तब नागालैंड क्षेत्र में जड़ी-बूटियों और प्राकृतिक औषधियों का प्रचुर भंडार था. जिसे ब्रिटेन भेजा जाता था. औषधियों पर दूसरों की नजर न पड़े, इसके लिए ब्रिटिश शासन ने नागालैंड के हिस्से में इनर लाइन परमिट की शुरुआत की थी. ताकि इस इलाके का संपर्क बाहरी क्षेत्रों से न हो सके.

आजादी के बाद भी सरकार ने इनर लाइन परमिट को जारी रखा. इसके पीछे तर्क था कि नागा आदिवासियों का रहन-सहन, कला संस्कृति, बोलचाल औरों से अलग है. ऐसे में इनके संरक्षण के लिए इनर लाइन परमिट जरूरी है. ताकि बाहरी लोग यहां रहकर उनकी संस्कृति प्रभावित न कर सकें

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